दीर्घकालिक कृषि

हंगर फ्री और सदाबहार पर्यावरण अनुकूल भारत के लिए मार्ग

दीर्घकालिक कृषि –द्वितीय हरित क्रान्ति- राष्ट्री य खाद्य सुरक्षा

प्राकृतिक संसाधन आधार, जो दीर्घकालिक रूप से कृषि उत्‍पादन मुहैया कराता है, सिकुड़ रहा है और कम होता जा रहा है और बदले में यह हमारे पर्यावरण प्रणाली की उत्‍पादन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है. बहरहाल, जनसंख्‍या बढ़ने और प्रति व्‍यक्ति आय बढ़ने तथा औद्योगिक क्षेत्र का विकास होने के साथ ही कृषि की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है. इसलिए, समस्‍या की सख्‍ती से पहचान करने, कृषि क्षेत्र की व्‍यावहारिकता को पुन: बहाल करने के लिए इसका सामना करने तथा इसे वापस उच्‍चतर विकास की ओर ले जाने की अत्‍यंत आवश्‍यकता है. बहरहाल, समस्‍याओं को दूर किया जा सकता है, विशेषरूप से, जब कृषि में विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नई तरक्‍की होने से अवसरों में उल्‍लेखनीय रूप से वृद्धि हुई है. बहरहाल, कृषि क्षेत्र को दीर्घकाल के लिए स्‍वयं ही संपूर्ण रूप में अलग प्रकार के दृष्टिकोण की आवश्‍यकता है, जिसमें शामिल है: निजी क्षेत्र की भागीदारी और बाज़ार के साथ संपर्क विकसित करना।

नुजिवीडू सीड्स का दीर्घकालिक रूप से कृषि संबंधी विकास में विश्‍वास है और हमारे वैज्ञानिक अभिनवीन उत्‍पादों और प्रौद्यागिकियों के लिए गंभीर रूप से प्रयासरत हैं जो कम संसाधनों से ही अधिक उत्पादन में सहायक हैं. यहां ऐसे कुछ उदाहरण दिए गए हैं, जिसमें हमने दीर्घकालिक विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

पारिस्थितिक रूप से दीर्घकालिक


कुछ वर्ष पहले भारत में कुल कीटनाशकों का 51 प्रतिशत केवल कपास में ही कीटों के नियंत्रण करने में उपयोग किया जाता था. परन्‍तु बीटी कॉटन हाइब्रिड के आ जाने से, फसलों में कीट एवं रोग प्रतिरोध बढ़ने के कारण कीटनाशकों के उपयोग में उल्‍लेखनीय ढंग से कमी आई है. बीटी कॉटन बीजों में 28 प्रतिशत बाजार शेयर के साथ नुजिवीडू सीड्स ने कीटनाशकों की खपत कम करने में महत्‍वपूर्ण रूप से योगदान दिया है और रसायन प्रदूषण कम करने तथा पर्यावरण संरक्षण में सहायता की है. पानी और श्रम की कमी जैसी अन्‍य तंगियों से निपटने के लिए नुजिवीडू सीड्स, प्रत्‍यक्ष रूप से बोये हुए चावल संबंधी प्रौद्योगिकी के साथ प्रयोग कर रहा है जो पानी का कम उपयोग करके चावल उत्पादन बढ़ाने की एक पद्धति है.

आर्थिक रूप से दीर्घकालिक


बीटी कॉटन ने भी किसानों के लिए उनकी खेती की आय बढ़ाकर और कीटनाशी निवेश लागतों को आधा करके किसानों के आर्थिक लाभों को बढ़ाने में योगदान दिया है. नुजिवीडू सीड्स के हाइब्रिड बीटी कॉटन ने किसानों की आय बढ़ाकर ग्रामीण भारत के परिवर्तन में योगदान दिया है जिसके परिणामस्‍वरूप ग्रामीण क्षेत्रों में रहन-सहन के स्‍तर के मानदंडों मे सुधार हुआ है.

भारत में लगभग 7 मिलियन किसान हमारे बीजों का उपयोग कर रहे हैं और 4200 बिलियन करोड़ रुपयों की राशि का सृजन किया है जिसने उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से समृद्ध किया है और साथ ही ग्रामीण भारत का विकास किया है.

सामाजिक रूप से दीर्घकालिक

कपास में उच्चरतर पैदावार के कारण उच्चय मौद्रिक लाभों के अलावा, स्वा्स्य्कॉ जांच में वृद्धि, नवजात शिशुओं/बच्चोंय के लिए समय पर टीके लगवाने और ग्रामीण भारत में विद्यालयों में अधिक संख्याम में बच्चोंा के दाखिले जैसे सामाजिक आर्थिक संकेतों से पता चलता है कि बीटी फसलों के रूप में बेहतर खेती पद्धतियों और बेहतर खेती निवेशों के उपयोग का ही प्रभाव पड़ा है. ग्रामीण रहन-सहन में यह सुधार आय में वृद्धि के कारण है जो बीटी कॉटन खेती और प्रभाव के परिमाण के परिणामस्व रूप है तथा यह किसान समुदायों के बीच नुजिवीडू सीड् के बीटी कॉटन हाइब्रिड बीजों के कारण संभव हो पाया है.

किसान समुदाय के प्रति नुजिवीडू सीड् के बीटी कॉटन हाइब्रिड द्वारा दिए गए योगदान को देखते हुए 2008, 2010, 2011 के बायो स्पैजक्ट्रबम-एबीएलई अध्युयन में यह पता चला है कि नुजिवीडू सीड्स प्रा. लि. के बीटी कॉटन हाइब्रिड बीज के सबसे बड़े वितरक हैं और इसलिए नुजिवीडू सीड्स प्रा. लि. को ‘’उत्तुम बायो एग्री कंपनी’’ का पुरस्कारर प्रदान किया गया है.

इस वर्ष तक भारत में लगभग 5.5 मिलियन किसान हमारे बीजों का उपयोग कर रहे हैं, जो उन्‍हें गुणात्‍मक आऊटपुट और अधिक पैदावार के कारण बेहतर कीमतें दिलाने में सहायक सिद्ध हुए हैं.

पिछले लगातार तीन वर्षों (2008, 2010, 2011) से बायो स्पैाक्ट्र म-एबीएलई अध्युयन में यह पता चला है कि नुजिवीडू सीड्स प्रा. लि. के बीटी कॉटन हाइब्रिड बीज के सबसे बड़े वितरक हैं और इसलिए नुजिवीडू सीड्स प्रा. लि. को ‘’उत्त म बायो एग्री कंपनी’’ का पुरस्कायर प्रदान किया गया है.

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